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साथ (उपन्यास)

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    साथ उपन्यास     दुःख छिपा सकूँ , सुख बाँट सकूँ तन–मन का साथ पाकर   दुःख में भी रम सकूँ!     सरण रा ई           कृति   : साथ विधा   : उपन्यास उपन्यासकार : सरण रा ई सर्वाधिकार : © उपन्यासकार के पास सुरक्षित       समर्पण   मनुष्य होकर जन्म लेकर भी सही सोच न बना सकने वाले , दूसरों की सोच और नियंत्रण में दास बने हुए और दास बनाए जा रहे सामान्य , साधारण , आम ज़मीनी लोगों के लिए— उन सामान्य , साधारण , आम ज़मीनी लोगों को प्रेम , आस्था , सम्मान और श्रद्धा सहित सदैव साथ… साथ         उपन्यास की विषय-सूची प्रारम्भ : संवाद अध्याय— पहला : बढ़ते–बढ़ते 1.     माँ 2.     बड़ी बहन 3.     किनारे ही किनारे 4.     रहस्यमय आश्रम 5.     नई बस्ती अध्याय— दूसरा : पौधा घना होता हुआ 1.     शहरी चकाचौंध 2.     दाम्पत्य सुख 3. ...